Thursday, February 2, 2023
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Makar Sankranti in Hindi Essay

Makar Sankranti in Hindi Essay : भारत त्योहारों का देश है यहाँ इतने त्यौहार मनाये जाते है शायद ही कही और मनाये जाते है भारत में हर महीने कोई न कोई त्यौहार आता ही है अभी कुछ महीनो पहले दीपावली गयी अब Makar Sankranti का त्यौहार आने वाला है और मकर संक्रांति का त्यौहार बड़ी धूम धाम से भारत में मनाया जाता है और साथ ही विदेश में भी लोग इस त्यौहार को भी मानते है ऐसे में सबसे मजेदार बात ये है की स्कूल के बच्चो को २-३ दिन की छुट्टी मिलती है और इस त्यौहार को खूब आनद से मानते है और साथ ही उनको Makar Sankranti Essay भी लिखने को मिलते है इसलिए आप लोगो के साथ हमने मकर संक्रांति निबंध साझा किया है |

Makar Sankranti in Hindi Essay

हमने Makar Sankranti in Hindi Essay में आप लोगो को Step by Step निबंध के साथ उनके प्रस्तावना , महत्व , खासियत और इससे पड़ने वाले हमारी राशि के असर के बारे में साझा किया है क्योकि मकर संक्रांति का निबंध स्पष्ट और जानकारी वाला होना चाहिए जिससे पढ़ने वाले को मजा आ जाये |

मकर संक्रांति के साथ महाभारत की एक कहानी भी जुडी है जो आप लोगो को अवश्य जानना चाहिए क्योकि ये हमारे धर्म से जुडी है और हमें हमेशा अपने धर्म के बारे में जानना चाहिए|

Makar Sankranti in Hindi Essay 2023

प्रस्तावना

मकर संक्रंति हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है | यह त्यौहार , सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाया जाता है। इस पर्व की विशेष बात यह है की यह अन्य त्योहारों की तरह अलग अलग तारीखों पर नहीं , बल्कि हर साल 14 January को मनाया जाता है , जब सूर्य उत्तरायण होकर मकर रेखा से गुजरता है |

कब मनाया जाता है यह त्योहार

मकर संक्रंति का संबंध सीधा पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है | जब भी सूर्य मकर रेखा पर आता है वह दिन 14 January ही होता है और इस दिन से धरती पर अच्छी दिनों की शुरुवात होती है , कभी कभी यह दिन पहले या बाद में यानी 13 January या 15 January को भी मनाया जाता है |

इसके बारे में एक रोचक बात है जो आपको अवश्य जानना चाहिए

वर्ष 2008 से 2080 तक मकर संक्राति 15 जनवरी को होगी एवं विगत 72 वर्षों से (1935 से) प्रति वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती रही है।

पुनः 2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी। ज्ञातव्य हो कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिवस से, मिथुन राशि तक में सूर्य के बने रहने पर सूर्य उत्तरायण का तथा कर्क से धनु राशि तक में सूर्य के बने रहने पर इसे दक्षिणायन का माना जाता है। सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण प्रति वर्ष लगभग 20 मिनट देरी से होता है। मोटे तौर पर तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का तथा 72 वर्षो में पूरे 24 घंटे का हो जाता है।

यही कारण है, कि अंग्रेजी तारीखों के मान से, मकर-संक्रांति का पर्व, 72 वषों के अंतराल के बाद एक तारीख आगे बढ़ता रहता है।

मकर संक्रांति किस लिए मनाई जाती है?

इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी दिन सूर्य,अपने पुत्र शनिदेव से अपने लम्बे समय की नाराज़गी छोड़कर मिलने आए थे।इस दिन से ही बसन्त ऋतु की शुरुआत होती है। आज के दिन से ही शुभ काम शुरू कर सकते हैं।

मकर संक्रांति की खासियत

इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर स्नान किया जाता है | इसके अलावा तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य व्यंजन भी बनाये जाते है। इस समय महिलाये सुहाग की सामग्री का आदान प्रदान भी करती है | ऐसा माना जाता है की इससे उनके पति की आयु लम्बी होती है |

मकर संक्रांति अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल कहते हैं। आंध्र प्रदेश कर्नाटक और केरल में इसे केवल संक्रांति के नाम से मनाया जाता है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से कहा जाता है। गुजरात में इसे उत्तरायण कहा जाता है।

पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी पर्व मनाया जाता है |

धर्म ज्योतिष की नजर से मकर संक्रांति

ज्योतिष की दृष्टि से देखे तो इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य के उत्तरायण की गति में प्रारम्भ होती है| सूर्य के उत्तरायण प्रवेश के साथ स्वागत पर्व के रूप में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। वर्षभर में बारह राशियों मेष , वृषभ , मकर ,कुम्भ , धनु इत्यादि में सूर्य के बारह संक्रमण होते है और जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है तब मकर संक्रांति होती है।

मकर संक्रांति में दान का महत्व

सूर्य के उत्तरायण होने के बाद से देवो की ब्रह्मा मुहूर्त उपासना का पुण्यकाल प्रारम्भ हो जाता है | इस कल को ही परा -अपरा विद्या की प्राप्ति का काल कहा जाता है | इसे साधना का सिद्धि काल भी कहा गया है। इस काल में देव प्रतिष्ठा , गृह निर्माण , यज्ञ कर्म आदि पुनीत कर्म किये जाते है | मकर संक्राति को स्न्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है | इस दिन तीर्थो एवं नदियों में स्नान का बेहद महत्व है साथ ही तिल , गुड़ , खिचड़ी , फल एवं राशि अनुसार दान करने का पुण्य की प्राप्ति होती है | ऐसा कहा जाता है की इस दिन किये गए दान से सूर्य देवता भी प्रसन्न होते है |

मकर संक्रांति का महाभारत से सम्बन्ध

महाभारत में पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था, कारण कि उत्तरायण में देह छोड़ने वाली आत्माएं या तो कुछ काल के लिए देवलोक में चली जाती है या पुनर्जन्म के चक्कर से उन्हें छुटकारा मिल जाता है। दक्षिणायन में देह छोड़ने पर बहुत काल तक आत्मा को अंधकार का सामना करना पड़ता है।

सब प्रकृति के नियम के तहत है, इसलिए सभी कुछ प्रकृति से बद्ध है। पौधा प्रकाश में अच्छे से खिलता है, अंधकार में सिकुड़ भी जाता है। इसलिए मृत्यु हो तो प्रकाश में हो ताकि साफ-साफ दिखाई दे कि हमारी गति और स्थिति क्या है।

स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण का महत्व बताते हुए गीता में कहा है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब, सूर्य देव उत्तरायण होते है और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का त्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता, ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त करते हैं। इसके विपरीत सूर्य के दक्षिणायन होने पर पृथ्वी अंधाकारमय होती है और इस अंधकार में शरीर का त्याग कर पुन: जन्म लेना पड़ता है।

मकर संक्रांति में पतंग क्यों उड़ाई जाती है ?

पतंग को आजादी, खुशी और शुभ संदेश का प्रतीक माना जाता है. कई जगह लोग इस पर्व पर तिरंगी पतंग भी उड़ाते हैं. माना जाता है कि पतंग उड़ाने से दिमाग संतुलित रहता है और दिल को खुशी का एहसास होता है. मकर संक्रांति पर बच्चों के लिए कई जगहों पर मेलों का आयोजन किया जाता है |

पतंग एक धागे के सहारे उड़ने वाली वस्तु है जो धागे पर पडने वाले तनाव पर निर्भर करती है। पतंग तब हवा में उठती है जब हवा (या कुछ मामलों में पानी) का प्रवाह पतंग के ऊपर और नीचे से होता है, जिससे पतंग के ऊपर कम दबाव और पतंग के नीचे अधिक दबाव बनता है। यह विक्षेपन हवा की दिशा के साथ क्षैतिज खींच भी उत्पन्न करता है।

उपसंहार

इन सभी मान्यताओं के आलावा मकर संक्रांति पर्व एक उत्साह से जुड़ा है इस दिन पतंग उड़ाने का विशेष महत्त्व है। कई कई जगह पतंगबाजी के बड़े बड़े आयोजन भी किये जाते है लोग बेहद हर्ष और उल्लास के साथ पतंगबाजी करते है ये त्यौहार हमारी ज़िंदगी में ख़ुशी और उल्लास भर देते है क्योकि हमारी ज़िंदगी में वैसे भी समस्या है और त्यौहार आते ही बच्चे बूढ़े औरते जवान सभी ख़ुशी हो जाते है और ख़ुशी से बढ़कर कुछ नहीं है मकर संक्रांति में खिचड़ी के साथ साथ तिल और गुड़ खाया जाता है और जिंदगी में मिठास भर देता है |

मकर संक्रांति का अर्थ है कि हमें उस भ्रम के अंधेरे से दूर हो जाना चाहिए जिसमें हम रहते हैं और खुशी-खुशी अपने भीतर के प्रकाश को चमकने देना चाहिए । हमें पवित्रता, ज्ञान और ज्ञान में विकसित होना चाहिए जैसे इस दिन से सूर्य करता है।

Makar Sankranti से जुड़े पूछे जाने वाले प्रश्न

Makar Sankranti Kab Hai 2023 Mein?

Makar Sankranti 2023 में 14 January 2023 में है |

मकर संक्रंति 2023 में कौन सी तिथि को है?

14 जनवरी 2023, शनिवार को पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी की तिथि को मनाया जाएगा. 

मकर संक्रांति 2023 के दिन के शुभ मुहूर्त ?

मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त 07:15:13 से 12:30:00 तक  

मकर संक्रांति के पीछे की कथा क्या है

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं. चूँकि शनि मकर राशी के देवता हैं इसी कारन इसे मकर संक्रांति कहा जाता हैं.

महाभारत का उत्तरायण से क्या सम्बन्ध है?

प्राचीन कथाओं की मानें तो  महाभारत युद्ध के योद्धा और कौरवों की सेना के सेनापति गंगापुत्र भीष्म पितामह को इच्छा मुत्यु का वरदान प्राप्त था. अर्जुन के बाण लगाने के बाद उन्होंने इस दिन की महत्ता को जानते हुए अपनी मृत्यु के लिए इस दिन का चयन किया था.

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