Tuesday, February 7, 2023
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26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर निबंध हिंदी में | गणतंत्र दिवस का पूरा इतिहास |

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर निबंध हिंदी में : गणतंत्र दिवस एक ऐसा पर्व है जो हर भारतीय का गौरव का दिन है चाहे हिन्दू हो मुस्लिम या अन्य कोई धर्म का हो यह दिन सभी लोगो के लिए खास है | इस दिन को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है और ये खुसी हर्ष उल्लास का दिन है लेकिन आपको क्या सच में पता है 26 January गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है इसका इतिहास क्या है इसलिए इसमें हमने साझा किया 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर निबंध हिंदी में और साथ ही उसका पूरा इतिहास साझा किया है |

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर निबंध हिंदी में

Republic Day Essay Hindi 2023 History

भारत गणराज्य ( Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या के दृष्टिकोण से चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आबादी चीन की 1.412 अरब आबादी से करीब 50 लाख ज्यादा है। एक विशाल देश, इतनी बड़ी आबादी और इस देश को चलना अपने आप में एक बोहोत बड़ी बात है।

जनसँख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा देश कौन सा है 2023 ?

2023 में जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व का सबसे बड़ा देश है ।

भारत पर राज कई शासकों ने किया कईओ ने इसे अपना घर बना लिया तो कईओ ने इसे बस लूटा, फिर चाहे वे मुगल हों या अंग्रेजी हुकूमत। 

15 अगस्त 1947 से पहले अंग्रेजो के आने से भी पूर्व भारत पर मुगल साम्राज्य की हुकूमत थी और बहादुर साह जफ़र आखरी मुग़ल शासक थे, उसके बाद भारत पर अंग्रेजी हुकूमत का सिकंजा कसता ही चला गया जिसने भारत को आर्थिक एवं सामाजिक दृश्टिकोण से बोहोत कमजोर बना दिया था। भारत में अंग्रेजी हुकूमत 1858 से 1947 तक थी और उसके भारत आधिकारिक तौर पर 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ।

भारत में अंग्रेजों से पहले किसकी हुकूमत थी?

अंग्रेजो के आने से भी पूर्व भारत पर मुगल साम्राज्य की हुकूमत थी |

हलाकि उस समाये भी हमारे ऊपर फ्रांस का और पुर्तगालियों का कब्ज़ा था और पुर्तगाली गोवा को आज़ाद करने के बाद 1961 में भारत से गए।  गोवा सबसे आखिर में आज़ाद होने वाला राज्य था।

हम आज़ाद तो हो गए थे लेकिन हमारे ऊपर साशन करने वाला कोई नहीं था भारत जैसा विशाल देश बिना किसी नेतृत्व के एक बोहोत ही बड़ी चुनौती थी।  तो अंग्रेज़ो ने कहा की हम आपको पूरी तरह से तब छोड़ कर जाएंगे जब आप संविधान बना लोगे और इस देख को उस संविधान के आधीन चलाओगे। तो संविधान बनाने की प्रक्रिया 1946से लेकर 1949 तक चली और 26 नवंबर 1949 को हमारा संविधान बन कर तैयार हुआ।

26 नवंबर 1949 को हमारा संविधान बन कर तैयार हुआ था और 26 जनुअरी 1950 को लागु हुआ था, संविधान बनने से ले कर संविधान लागु होने तक की कहानी आज हम आप को बताएंगे और बताएंगे की क्यों 26 जनुअरी को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मानते है।

संविधान बनाने की प्रकिर्या कब शुरू हुयी?

जब दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था तब इंग्लैंड को बोहोत भरी नुकसान पोहोचा था, जर्मनी ने लगातार 15 दिन और 15 रातो तक लंदन पर बम गिराए थे और इंग्लैं की जनता इससे बोहोत परेशां थी।  उस समय वह कन्सेर्वटिवे पार्टी की सत्ता थी और The Rt. Hon. Winston Churchill तब के प्रधान मंत्री थे।  उसी समय विपक्ष जो की लेबर पार्टी थी और उसके नेता थे Clement Attlee थे और उन्होंने कहा था की अगर हमारी सत्ता आती है तो हम भारत को आज़ाद कर देंगे और इस बात का भारतीओ ने भी समर्थन किया था। और जब क्लेमेंट अत्तली की सर्कार बानी तो वो भारत को आज़ाद करने के पक्ष में आगये। उन्होंने अपने 3 कैबिनेट मंत्रियों को भारत भेजा, वो 1946 में भारत आये थे जिसको “1946 Cabinet Mission ” कहा गया था।  इसमें ३ सदस्य थे, ए वी अलेक्जेंडर, स्टैफोर्ड क्रिप्स, पेथिक लॉरेंस।

Frederick Pethick-Lawrence इस मिशन के लीडर थे इन्होने भारत को कुछ मुख्या काम करने को कहे जिनमे एक तो ये था की आप सबसे पहले अंतरिम सरकार बना लीजिये और अगले 5 साल तक सीखिए की सरकार कैसे चलाई जाती है।  इसी लिए हमारे यहाँ प्रधान मंत्री का इलेक्शन 1951 में हुआ था और 1952 में हमे हमारे पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू मिले। फिर इसी कैबिनेट मिशन के तहत इन लोगो ने कहा की आप लोग संविधान बना लीजिये, जब तक संविधान पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता हम आप लोगो की देख रेख करेंगे और जैसे ही संविधान पूरी तरह से लागो हो जाएगा हम यहाँ से चलेजाएंगे और कैबिनेट मिशन के आधार पर 1946 से संविधान बनाने की प्रक्रिया चालू हुई।

अब ये संविधान कौन बनाएगा उसके लिए indirect election कराये गए और जो लोग चुन के आये थे उन्हें संसद के सेंट्रल हॉल में रखा गय।  जब ये लोग चुने गए थे तब साल 1946 था और तब भारत अखंड भारत था, तब न तो बांग्लादेश बना था और न पाकिस्तान बना था, 1946 में कुल 389 मेंबर्स चुन के आये थे संविधान को बनाने के लिए।  उसके बाद 1947 में जब देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना तक 389 मेंबर्स में से 90 मेंबर्स पाकिस्तान चले गए अब 1947 में 299 मेंबर्स थे जिन्हे संसद के Central Hall में रह कर संविधान बनाना था।  1947 से ले कर 1950 के बिच संविधान बना ओर लागु हुआ और इस दौरान कुछ मेंबर्स की मृत्यु हो चुकी थी और साल 1950 तक कुल 184 लोग शामिल थे जिनमे 15 महिलाये भी शामिल थी और ये दर्शाता है की भारत सदैव महिलाओ को समान अदिकार देता आया है।

गणतंत्र दिवस पर भाषण हिंदी में 2023 | 26 January Speech in Hindi 2023

हमारा जो Original संविधान है वो 13 किलो का है और उसपर जो हस्ताक्षर हैं वो इन्ही 284 लोगो के हैं।

संविधान बनाने के लिए अलग अलग समिति बनाई गई और उन्हें अलग अलग काम सोपे गए।  इस तरह से कुल 13 समिति बनाई गई  थी जो सहमति यानि की जिसमे ज्यादा तर लोगो की सहमति होती थी वो डिसिशन मान लिया था।  इन कमिट्टीस में जो सबसे प्रमुख समिति थी वो थी ड्राफ्टिंग समिति और इस ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष और चेयरमैन थे डॉ भीमराव आंबेडकर इन्होने पूरी कमीटीओ में आपस में समन्वय बनाया , कहा क्या गलत है क्या सही है और क्या सुधर करना है वो जिम्मेदारी ड्राफ्टिंग कमिटी की थी और डॉ भीमराव आंबेडकर ड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमैन थे इसी लिए उन्हें फाथे रॉ इंडियन कंस्टीटूशन कहा गया है।  इसके अ स्थायी सदस्य २ दिनों के लिए सचिदानंद सिन्हा थे।  लेकिन इसके स्थायी सदस्य राजेंदर प्रसाद थे।  राजेंदर प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे और इन्ही की देख रेख में संविधान सभा के कार्य होते थे।  संविधान सभा के सलाहकार बी एन राव थे।  संविधान को बनने में लगभग 2 साल, 11 महीने, 18 दिन लगे जो 1946 से चालू हुआ और 1949 में आख़िरकार बन के तैयार हुआ था।

जब संविधान बना था उस समय कुल चैप्टर 22 थे (वर्तमान में २५ हैं)।  अनुछेद ओरिजनली 395 है (वर्तमान में इनमे वृद्धि कर के ये कुल 448 हो गए हैं और ये आगे बढ़ते ही जाएंगे लेकिन इनकी असल संख्या 395 जी रहेंगी)। सचेडूले 8 थे (वर्तमान में बढ़ कर 12 हो गए है)।

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बन कर तैयार हुआ था और इस दिन को हम संविधान दिवस के रूप में मानते है।

संविधान बनाने में देरी क्यों हुयी ?

अब ये समझते है की संविधान लागू होने में 2 महीने की देरी क्यों हुई। दिसंबर 1929 में कांग्रेस पार्टी का अधिवेसन लाहौर में चल रहा था (अधिवेसन का मतलब जो सालाना मीटिंग होती है उसको अधिवेसन कहते है)।  इस अधिवेसन की अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे रवि नदी के तट से अपने भासन में उन्होंने कहा की अब हमे अंग्रेज़ो के सामने झुकने की जरुरत नहीं है हमे अब पूर्ण स्वराज चाहिए , उन्होंने कहा की अब हर भारतीय को जागना होगा और एक जुट होना होगा और आने वाले साल 1930में जनुअरी के आखरी रविवार को हम देश के कोने कोने में तिरंगा लहरा देंगे और स्वयं को स्वाधीन घोसित कर देंगे फिर कहे अँगरेज़ हमे आज़ादी दे या न दे। 1930में जनुअरी के आखरी रविवार को 26 तारिक पद रही थी और 26 जनुअरी 1930 को देश भर में तिरंगा फेहराया गया और ये ऐलान कर दिया गया की आज से हम स्वाधीन हो गए और उस दिन को हम स्वाधीनता दिवस के रूप में मानाने लगे और जवाहरलाल नेहरू ने कहा की हर वर्ष इसे मनाया जाएगा।  26 जनुअरी 1930 से ले कर 26 जनुअरी जनुअरी 1946 तक इसे स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया गया था। 

1950 के बाद से वर्तमान तक और आने वाले सभी वर्षो में 26 जनुअरी को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मानते थे और मानते रहेंगे।  26 जनुअरी दे दिन राजपथ पर परेड होती है।  इस दिन भारत अपने हथियारों का प्रदर्शन करता है।  भारत ने डिफेंस सेक्टर में क्या नए अविष्कार किये है उन्हें प्रदर्शित करता है।  हमारी तीनो सेना के शौर्य को दिखाया जाता है।

26 जनुअरी के दिन राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं, साथी प्रधानमंत्री भी मौजूद रहते है, तीनो सेनाओ के प्रमुख एवं चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ भी मौजूद रहते है।  मुख्या अतिथि को भी बुलाया जाता है हर साल।  मुख्या अतिथि हमारे करीबी या मित्र देश के प्रधान मंत्री या प्रेजिडेंट या उनके प्रतिनिधि होते होते है, इससे उस देश से हमारी घनिस्टता और भी ज्यादा मजबूत होती है।

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर निबंध हिंदी में निष्कर्ष

गणतंत्र दिवस का हमारे देश में एक बोहोत ही खाश महत्व है ये हमे दर्शाता है की एक देश को जोड़ कर रखना जिसमे अलग अलग जाती अलग अलग समुदाय और अलग अलग पंत के लोग रहते है और मिल कर रहते है, हमारे देश की संस्कृति ही यही है की हम हर किसी के साथ मिल कर रहते है प्रेम से रहते है। हम ये भी मानते है की कुछ छोटे मोटे विवाद होते है और ये होंगे आगे भी हमे ये समझना चाहिए की ये पूरा देश ही एक परिवार है और परिवार में नोक झोक तो होती ही है।  जैसे बर्तक की टोकरी में बर्तन होते है तो उन्हें चुने पर आवाज आती है उसी तरह परिवार में भी हलकी फुलकी नोक झोक होती है।  लेकिन ये देश हमेसा इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा यही कामना करते है हम और आप सबकी को ७४ वें गड्तंत्र दिवस की ढेर साडी सुभकामनाये।  जय हिन्द।

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