Thursday, February 2, 2023
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Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi PDF

Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi PDF : Hanumanji श्री राम के अनन्य भक्त जिनका नाम लेने से सभी कष्ट रोग सब समाप्त हो जाते है हनुमान जी का नित्य नाम लेने से विश्वास और एक ऊर्जा की नयी लहर दौड़ जाती है सिर्फ हनुमानजी का नाम लेने से भूत पिसाच जैसी बढ़ाओ से आप मुक्त हो सकते हो और अगर आप बहुत लम्बे समय से किन्ही समस्या से झूंझ रहे हो तो Hanuman Chalisa का पाठ आपके लिए बहुत ज्यादा जरुरी है तब तक कोई भी नकारात्मक ऊर्जा आपका स्पर्श नहीं कर सकती . इसके निरंतर जाप करने से साधक सबकुछ प्राप्त कर सकता है . इसलिए आपके साथ हमने Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi PDF दोनों साथ में साझा किये जिससे आप Lyrics की मदद से आप स्पष्ट रूप से पढ़ सकते है |

हनुमान चालीसा का पाठ करने के क्या होगा

हमारा उद्द्येश अगर आप किसी चीज़ को पढ़ रहे है तो आपको उनके फायदे क बारे में जरूर पता होना चाहिए जिससे हमारी इच्छा सकती और मजबूत होती है जैसे मेने आपको बताया हनुमान चालीसा का पाठ करने से इच्छा शक्ति  बहुत मजबूत होगी इसका अर्थ आप जो चाहेंगे कर पाएंगे हर मुश्किल काम आसान हो जायेगा आपके लिए और नकारात्मक शक्ति आपको छू तक नहीं पायेगी |

क्या हनुमान चालीसा पढ़ने से समस्या हल हो जाएगी ?

हाँ, अगर आप सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ेंगे तो आपकी समस्या जल्दी ही समाप्त हो जाएगी इसके लिए आपको पूर्ण निष्ठा और विश्वास से पाठ करना है।

हनुमान चालीसा कब पढ़ना चाहिए ?

जब भी आपके मन में प्रभु के प्रति सच्ची भक्ति प्रकट हो आपको विश्वास हो तो आप उस समय हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ सकते है|

क्या हनुमान चालीसा सच में काम करती है ?

हाँ , हनुमान चालीस सच में काम करती है आपके मन में १% भी शंका नहीं होनी चाहिए हनुमान चालीसा पूर्ण रूप से विश्वास में कायम है और आप हो काम चाहते की हो जाये उसमे विश्वास रखे और हनुमान चालीसा का पाठ पड़े आपके सभी काम सफल हो जायेंगे |

हनुमान चालीसा का पाठ सच्चे मन से और पूर्ण विश्वास से आप किसी भी मुश्किल काम को आसान और उस पर विजय पा सकते है साथ ही आप अपने शरीर को निरोगी बन सकते है |

जानकारी ले : Shree Kashtbhanjan Dev Aarti Lyrics in Hindi

Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi PDF Free Download

Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥

लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

भूत पिशाच निकट नहि आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥

सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

जै जै जै हनुमान गुसाईँ
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

सियापति राम जय जय राम
मेरे प्रभु राम जय जय राम

Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi PDF Free Download Fast

हर समस्या का समाधान है हनुमान चालीसा इसका नित्य पाठ करने से व्यक्ति का भाग्य बदल जाता है अगर आप हनुमान चालीसा अगर आप ध्यान से पढ़ेंगे उसमे एक चौपाई है

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा

इसका मतलब है की  ‘जो कोई भी विश्वास के साथ भगवान हनुमान के नाम का जप करेगा, उसे सभी प्रकार के रोगों और कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा।’ मैं मंत्रों की उपचार शक्ति में दृढ़ता से विश्वास करता हूं।

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